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26 February 2016

एक आंसूं

बरसों पहले गिरा था
एक आंसूं
जाने क्यूँ
वो आँखों की नमी
बरक़रार है !!!

- शाहिद अजनबी

14 February 2016

इश्के शहर

देखा जाए तो हर दिन मुहब्बत का है, जिस दिन में मुहब्बत नहीं वो दिन कैसा ? शायद हम और आप ऐसी दुनिया की कल्पना भी नहीं कर सकते , जहाँ मुहब्बत न हो, प्यार न हो, अहसास न हों, संवेदनाएं न हों. और अगर एक दिन मुक़र्रर कर भी दिया प्यार के लिए तो ठीक सही. अगर एक ख़ास दिन के बहाने , हम प्यार के अहसास को तरोताजा कर रहे हों , तो आइये उन अहसासों को जिंदा किया जाए और लवों पे मुस्कराहट आती है अगर इस दिन से तो चलो मनाते हैं वैलेन्टाइन डे. रही बात प्यार के दुश्मनों की वो अज़ल (जिस दिन से दुनिया बनी) से रहे हैं और शायद हमेशा रहेंगे. इस छोटी सी ज़िन्दगी में अगर आपने चार पल के लिए भी ये अहसास जी लिए तो तमाम उम्र आपका दिन ज़िन्दा रहेगा. 
   मुहब्बत परस्तों ! अपने आसपास मुहब्बत का ऐसा शहर बसा के तो देखो, जिसकी गलियां प्यार की हों, जिनमें खुशबुएँ अहसासों की हों  जिसकी छतें प्यार से लबरेज हों और दीवारों से इश्क़ की खुशबु आने लगे फिर तो आप जरुर ऐसे शहर में हैं जिसे हम इश्के शहर कह सकते हैं.फिर तो जरुर कोई ताहिर फ़राज़ साब की ये नज़्म गुनगुना रहा होगा 

बहुत खुबसूरत हो तुम

कभी जो मैं कहूं मुहब्बत है तुमसे
तो मुझको खुदारा ग़लत मत समझना
की मेरी जरूरत हो तुमबहुत …………….

है फूलों की डाली ये बाहें तुम्हारी
है खामोश जादू निगाहें तुम्हारी
जो काटें हों सब अपने दामन मैं रख लूँ
सजाऊँ मैं कलियों से राहें तुम्हारी
नज़र से ज़माने की ख़ुद को बचाना
देखो किसी से दिल न लगाना
की मेरी अमानत हो तुम
बहुत ………..
है चेहरा तुम्हारा की दिन है सुनहरा
उस पे ये काली घटाओं का पहरा
गुलाबों से नाजुक महकता बदन है
ये लव हैं तुम्हारे की खिलता चमन है
बिखेरो जो जुल्फें तो शरमाये बादल
जमाना भी देखे तो हो जाए पागल
वो पाकीजा मूरत हो तुमबहुत …………
जो बन के कली मुस्कराती है अक्सर
शबे हिज्र मैं जो रुलाती है अक्सर
जो लम्हों ही लम्हों में दुनिया बदल दे
जो शायर को दे जाए पहलू ग़ज़ल के
छुपाना जो चाहें छुपाई न जाए
भुलाना जो चाहें भुलाई न जाए
वो पहली मुहब्बत हो तुमबहुत ………………


Happy Valentine's Day - 16

- Shahid Ajnabi

18 August 2015

रगों में दौड़ते हैं आपके अल्फाज़


गुलज़ार साब !! क्या लिखूं , आपके लिए लफ्ज़ भी कम पड़ जाएँ....आप मेरे दिल के करीब हैं... रगों में दौड़ते हैं आपके अल्फाज़. ज़िन्दगी जीने का सलीका देते हैं आप. आपकी लिखावट रूह को ऐसे तस्कीन पहुंचाती है...जैसे किसी ने बर्फ का टुकड़ा रख दिया हो. क्या बधाईयाँ , क्या शुभकामनाएं.. दिल की दुआएं नज्र कर रहा हूँ.... क़ुबूल फरमाएं. आप हमेशा यूँ ही हमारे साथ रहें..... ख़ुदा आपको लम्बी उम्र बख्शे

11 May 2015

हर ख्वाब गर उतर पाता



20.9.14

हर ख्वाब गर उतर पाता हकीक़त की ज़मीं पर
जन्नत की आरजू में परेशां न फिरते लोग ....!!!
- ज़ारा खान

हवा के पास कोई मसलहत नहीं होती



21.10.14
चराग़ घर का हो ,महफ़िल का हो कि मंदिर का
हवा के पास कोई मसलहत नहीं होती .....
- वसीम साब

देशभक्ति गीत सिर्फ चुनाव के वक़्त बजते हैं


9.10.14

देशभक्ति गीत सिर्फ चुनाव के वक़्त बजते हैं --उसके बाद पता नहीं वो रिकॉर्ड कहाँ चले जाते हैं

हम हवा को गले लगाये थे



8.9.14
जितने अपने थे सब पराए थे हम हवा को गले लगाये थे
जितनी क़समें थीं सब थीं शर्मिंदा जितने वादे थे सर झुकाए थे
 
जितने आंसू थे सब थे बेगाने जितने मेहमां थे बिन बुलाए थे
सब किताबें पढ़ी पढाई थीं सारे किस्से सुने सुनाये थे
 
एक बंजर जमीं के सीने में मैंने कुछ आसमां उगाए थे
सिर्फ दो घूँट प्यास की खातिर उम्र भर धूप में नहाए थे
 
हाशिये पे खड़े हुए हैं हम , हमने खुद हाशिए बनाये थे
मैं अकेला उदास बैठा था , शाम ने कहकहे लगाये थे
 
है गलत उसको बेवफा कहना ,कहाँ हम कहाँ के धुले धुलाये थे
आज काँटों भरा मुकद्दर है, हमने गुल भी बहुत खिलाये थे
- राहत इन्दौरी

कहाँ तक आँख रोएगी



31.8.14
कहाँ तक आँख रोएगी कहाँ तक किसका ग़म होगा
मेरे जैसा यहाँ कोई न कोई रोज़ कम होगा

तुझे पाने की कोशिश में कुछ इतना रो चुका हूँ मैं
कि तू मिल भी अगर जाये तो अब मिलने का ग़म होगा

समन्दर की ग़लतफ़हमी से कोई पूछ तो लेता ,
ज़मीं का हौसला क्या ऐसे तूफ़ानों से कम होगा

मोहब्बत नापने का कोई पैमाना नहीं होता ,
कहीं तू बढ़ भी सकता है, कहीं तू मुझ से कम होगा
- Waseem Bareillvy